भगवान शिव किसके ध्यान में रहते हैं मग्न? जानें कौन हैं भोलेनाथ के आराध्य देव

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भगवान शिव हमेशा ही ध्यान की मुद्रा में रहते हैं। उन्हें देवों के देव महादेव भी कहा जाता है। भगवान शिव को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। भोलेनाथ, नीलकंठ, शिवशंकर, अर्धनारीश्वर, महादेव ऐसे ही कई नाम हैं। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन में और श्रद्धा से भगवान भोलेनाथ की पूजा करता है, उसके सभी दुख दूर हो जाते हैं।

अक्सर हमलोग देखते हैं कि भगवान शिव हमेशा ध्यान मुद्रा में ही रहते हैं। लेकिन क्या आपके मन में ये सवाल नहीं आया है कि जब भगवान शिव खुद ईश्वर हैं तो फिर वे किसकी आराधना करते हैं। किसके ध्यान में लीन रहते हैं।

अजर-अमर हैं भगवान शिव?

पद्म पुराण और शिव पुराण में लिखा गया है कि शिव इस सृष्टि के आरंभ से हैं और इस सृष्टि के अंत तक रहेंगे। शिव ही आदि हैं और अंत भी शिव ही हैं। वे अनंत हैं। उनका कोई अंत नहीं है। त्रिदेवों में शिव को परमशक्ति की संज्ञा दी गई है। भगवान शिव सभी देवताओं के आराध्य हैं।

ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा जी के आंसुओं से भूत-प्रेत बने और मुख के तेज से रुद्र की उत्पत्ति हुई। भूत-प्रतों को शिव का गण माना जाता है। इस ब्रह्मांड में जीवन का संचार करने वाले शिव ही हैं। भगवान शिव का कोई अंत नहीं है। वह अजन्मा हैं। उन्हें स्वयंभू भी कहा जाता है।

भगवान शिव किसके ध्यान में रहते हैं मग्न?

शिव पुराण में भगवान शिव के बारे में कहा गया है कि वे श्रीराम का ध्यान लगाते हैं। इसको लेकर एक कथा भी प्रचलित है जिसमें माता पार्वती ने शिव के ध्यान से उठने के बाद पूछा कि आप स्वयं देवों के देव हैं। आपको देवाधिदेव कहा जाता है, फिर आप किसका ध्यान करते हैं।

इसके बाद भगवान शिव ने कहा इसका जवाब वह जल्द ही देंगे। फिर भगवान शिव ने ऋषि कौशिक के सपने में आकर उन्हें राम रक्षा स्त्रोत लिखने का आदेश दिया। तब ऋषि कौशिक ने सपने में ही भगवान शिव से प्रार्थना करते हुए कहा कि वह राम रक्षा स्त्रोत लिखने में सक्षम नहीं हैं।

तब भगवान शिव ने ऋषि कौशिक को ज्ञान प्राप्ति की शक्ति दी। जिसके बाद ऋषि कौशिक ने राम रक्षा स्त्रोत की रचना की। इसके बाद भगवान शिव ने माता पार्वती को राम रक्षा स्त्रोत पढ़कर सुनाया। इसके बाद भगवान शिव ने पार्वती से कहा कि वह भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम का ध्यान करते हैं।

भगवान शिव ने आगे कहा कि राम नाम के जप में जितनी शक्ति है, वह विष्णु जी के सहस्त्र नाम अर्थात हजारों नाम के बराबर है। इसलिए राम ही भगवान शिव के आराध्य हैं।


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